भारतीय लोकतंत्र में युवा भागीदारी और भविष्य की संभावनाएँ

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पूरन मल मीना

Abstract

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के साथ-साथ सबसे युवा लोकतंत्र भी है। 18-35 वर्ष के युवा देश की कुल आबादी का लगभग 65 प्रतिशत हैं, लेकिन राजनीतिक भागीदारी के संदर्भ में उनकी भूमिका अभी भी सीमित है। वर्तमान शोध पत्र 2014 तथा 2019 के लोकसभा चुनावों के आंकड़ों, लोकनीति-सीएसडीएस सर्वे तथा निर्वाचन आयोग की रिपोर्टों के आधार पर युवा मतदाता पंजीकरण, मतदान प्रतिशत, राजनीतिक जागरूकता और निर्णय-प्रक्रिया में भागीदारी का विश्लेषण करता है। अध्ययन से पता चलता है कि 2019 के चुनावों में युवा मतदान प्रतिशत लगभग 67 प्रतिशत रहा, जो 2014 से थोड़ा कम था। युवाओं में राजनीतिक रुचि उच्च है, किंतु बेरोजगारी, राजनीतिक निराशा, वंशवादी राजनीति और नागरिक शिक्षा की कमी जैसी चुनौतियां उनकी सक्रिय भागीदारी को सीमित करती हैं। भविष्य की संभावनाओं में सोशल मीडिया, एनवाईकेएस (Nehru Yuva Kendra Sangathan) तथा एनएसएस (National Service Scheme) जैसे कार्यक्रमों का विस्तार, डिजिटल साक्षरता, उम्मीदवारी आयु में कमी और युवा-केंद्रित नीति-निर्माण शामिल हैं। शोध पत्र सुझाव देता है कि यदि युवाओं को राजनीतिक प्रक्रिया में सशक्त बनाया जाए तो भारतीय लोकतंत्र अधिक समावेशी, पारदर्शी और भविष्योन्मुखी बन सकता है। यह अध्ययन सैद्धांतिक रूप से लोकतांत्रिक सिद्धांत (participatory democracy) और व्यावहारिक रूप से चुनावी डेटा (2014-2019) पर आधारित है।

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