मगध मण्डल के शासकीय एवं अशासकीय प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत छात्राध्यापक की शिक्षण संतुष्टि का तुलनात्मक अध्ययन
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Abstract
नई शिक्षा नीति के अन्तर्गत विभिन्न क्षेत्रों में कदम उठाए गए हैं। उनमें अध्यापकों की जवाबदेही विषय भी विचारणीय है। और आज के बदलते हुए परिवेश में इस विषय पर विचार करना अनिवार्य है। भारत सरकार ने सर्वोच्च विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग का गठन स्वतंत्र भारत की नवीन आवश्यकताओं एवं मांगों के अनुकूल शिक्षा के पुनर्गठन हेतु उपयुक्त सुझाव देने के लिए किया। इस आयोग ने शिक्षकों के व्यक्तिगत समन्वय में कोई चर्चा नहीं की। राष्ट्रीय शिक्षा आयोग ने प्रथम बार शिक्षकों के व्यक्तिगत समन्वय में आचारण एवं अनुशासन सम्बन्धी नियमों की चर्चा की। इस आयोग ने विश्वविद्यालयों को स्वायत्तता का आधार भी प्रदान किया।
इसका स्वाभाविक तात्पर्य यह था कि विश्वविद्यालयों को शिक्षकों की नियुक्ति, पदोन्नति, वेतन, प्रवेश, पाठ्यक्रम निर्धारण तथा परीक्षाओं के लिए स्वायत्तता प्रदान की जाये। जिससे उच्च शिक्षा स्तर को ऊँचा उठाने में सहायता हो। अध्यापक शिक्षा एक निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया होने के कारण उसे लचीलापन, मानवीय एवं अन्तः अनुशासन की आवश्यकता है।