उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों की अभिप्रेरणा के स्तर का अध्ययन: एक विस्तृत मनोवैज्ञानिक विश्लेषण
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Abstract
अभिप्रेरणा शिक्षा–मनोविज्ञान का केंद्रीय अवधारणा–क्षेत्र है, जो विद्यार्थियों के सीखने, उपलब्धि की दिशा में निरंतर प्रयास, लक्ष्य–निर्धारण, आत्म–अनुशासन तथा कार्य के प्रति समर्पण जैसे व्यवहारों का मूल प्रेरक कारक है। विशेषतः किशोरावस्था में, विद्यार्थी अनेक सामाजिक–भावनात्मक परिवर्तनों से गुजरते हैं, जिसके कारण उनकी शिक्षा के प्रति रुचि, अध्ययन–निष्ठा, perseverance (दृढ़ता), प्रयास–निरंतरता तथा उपलब्धि–उन्मुखता में तीव्र परिवर्तन होते हैं। इस संदर्भ में अभिप्रेरणा का उच्च स्तर न केवल विद्यार्थियों की शैक्षणिक सफलता में सहायता करता है, बल्कि उनके व्यक्तित्व, स्व–अनुशासन, स्व–धारणा, आत्म–प्रभाविता तथा सामाजिक अनुकूलन को भी सुदृढ़ बनाता है।
इसके विपरीत, अभिप्रेरणा का निम्न स्तर विद्यार्थियों में अध्ययन–रुचि की कमी, असंगठित अध्ययन–आदतें, प्रयास में अनियमितता तथा भविष्य के प्रति अस्पष्ट एवं अनिर्णयात्मक दृष्टिकोण का कारण बन सकता है।
इसी पृष्ठभूमि में प्रस्तुत शोध का उद्देश्य यह समझना है कि उच्चतर माध्यमिक स्तर के विद्यार्थी अभिप्रेरणा के किस–किस स्तर पर पाए जाते हैं, उनका वितरण किन पैटर्नों का अनुसरण करता है, तथा आगे की शैक्षिक योजना, मार्गदर्शन एवं विद्यार्थियों के मानसिक–शैक्षणिक उन्नयन में इन निष्कर्षों की क्या भूमिका हो सकती है।