मैथिलीशरण गुप्त की कविताओं में इतिहासबोध : एक समकालीन अध्ययन
Main Article Content
Abstract
मैथिलीशरण गुप्त (1886-1964) आधुनिक हिंदी साहित्य के उन पुरोधा कवियों में से हैं जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से भारतीय समाज, संस्कृति और इतिहास का ऐसा समाहार प्रस्तुत किया हैं जिसे पढ़ कर पाठक राष्ट्र चेतना, ऐतिहासिक गौरव और सामाजिक जागरूकता को लेकर सहज ही प्रेरित होता है। मैथिलीशरण गुप्त जी को राष्ट्रकवि और मानवतावादी कवि के रूप में देखा जाता है। वे लगभग साठ वर्षों तक साहित्य-साधना में समर्पित रहे । यह वह दौर था जहाँ भारतीय जनमानस में एक ओर राजनीतिक स्वतंत्रता की आकांक्षा को लेकर संघर्षरत था, वहीं दूसरी ओर वह आत्म-चिंतन और सांस्कृतिक पुनरुत्थान की ओर भी अग्रसर था। ऐसे समय में गुप्त जी ने जो काव्य रचा, वह मात्र देश प्रेम या परंपरागत गौरव का चित्रण नहीं था, बल्कि वह एक सजग इतिहास-बोध और सांस्कृतिक आत्मालोचना का दस्तावेज़ भी था।
Article Details
Issue
Section
Articles