पाली साहित्यों में उल्लेखित बोधगया का इतिहास
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Abstract
बोधगया बिहार राज्य के गया जिले में स्थित है । यह स्थान गया मुख्यालय से 16 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है । यह स्थल बौद्ध धर्म के महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है, जहां पर गौतम बुद्ध ने 6 वर्षो तक ध्यान किया । तत्पश्चात उन्हें ‘बोधि’ की प्राप्ति हुई । और इसी स्थान पर परम ज्ञान का सुख लेते हुए सात सप्ताह व्यतीत किए । बौद्ध मतानुयायियों के लिए यह स्थल अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है । पालि साहित्य में बोधगया को ‘उरुवेला’ के नाम से उल्लेखित किया गया है । चीनी यात्री फ़ाहियान और ह्वेनसांग ने भी इस स्थल का वर्णन अपने यात्रा वृतांत में किया है । ह्वेनसांग ने अपने यात्रा वृतांत में यहां पर स्थित महाबोधि मंदिर का विस्तृत वर्णन किया है । प्राचीन काल में निरंजना नदी के आसपास के क्षेत्र को उरुवेला कहा जाता था । यह शोध-पत्र बौद्ध साहित्यों में वर्णित बोधगया के इतिहास से संबंधित है जिसमें बोधगया के ऐतिहासिक महत्व का वर्णन किया गया है । पालि साहित्यों में बोधगया के संदर्भ में उरुवेला शब्द का कई बार प्रयोग देखने को मिलता है । निदानकथा, अंगुत्तरनिकाय, ललितविस्तर, मज्झिमनिकाय, महावग्ग, महावंश, आदि में उरुवेला का विवरण मिलता है । बोधगया का प्रमुख आकर्षण यहां स्थित महाबोधि मंदिर है । जिसे बौद्ध अनुयायियों और पर्यटकों का एक महत्वपूर्ण पुनरागमन स्थल माना जाता है । बोधगया सात पवित्र स्थलों के लिए भी प्रसिद्ध है जहां पर बुद्ध ने सात सप्ताह व्यतीत किए थे । जिसमें से प्रथम सप्ताह बोधिवृक्ष के नीचे, द्वितीय सप्ताह अनिमेषलोचन स्तूप, तृतीय सप्ताह चंक्रमण करते हुए, चतुर्थ सप्ताह रत्नघर, पंचम सप्ताह अजपाल न्यग्रोध वृक्ष के नीचे, षष्ठ सप्ताह मुचलिन्द सरोवर एवं सप्तम सप्ताह राजायतन वृक्ष के नीचे व्यतीत किया । बौद्ध धर्म की दृष्टि से ये सभी स्थल अत्यंत महत्वपूर्ण है ।