भारत में महिला राजनीतिक प्रतिनिधित्व:उपलब्धियां , चुनौतियां और संभावनाएं
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Abstract
भारत में महिला राजनीतिक प्रतिनिधित्व लोकतांत्रिक समावेशन, लैंगिक समानता तथा सामाजिक न्याय का महत्वपूर्ण आयाम है। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य भारत में महिला राजनीतिक प्रतिनिधित्व के ऐतिहासिक एवं संवैधानिक विकास, वर्तमान स्थिति, उपलब्धियों, संरचनात्मक चुनौतियों तथा भावी संभावनाओं का विश्लेषण करना है। अध्ययन में संसद, राज्य विधानमंडलों तथा पंचायती राज एवं नगरीय स्थानीय स्वशासन संस्थाओं में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को केंद्र में रखा गया है। भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त राजनीतिक समानता तथा 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के माध्यम से स्थानीय स्वशासन में आरक्षण ने महिलाओं के राजनीतिक प्रवेश का व्यापक संस्थागत आधार निर्मित किया है। साथ ही, संविधान (106वाँ संशोधन) अधिनियम, 2023 ने संसद एवं राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के प्रश्न को नए संवैधानिक परिप्रेक्ष्य में स्थापित किया है।
अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि प्रतिनिधित्व में वृद्धि को स्वतः राजनीतिक सशक्तिकरण का पर्याय नहीं माना जा सकता। पितृसत्तात्मक सामाजिक संरचना, राजनीतिक दलों में महिलाओं की सीमित भागीदारी, संसाधनों तक असमान पहुँच, चुनावी राजनीति की लागत, राजनीतिक हिंसा, सामाजिक रूढ़ियाँ तथा निर्णयात्मक स्वायत्तता की सीमाएँ महिला राजनीतिक सहभागिता को प्रभावित करती हैं। अतः अध्ययन संख्यात्मक प्रतिनिधित्व और सार्थक राजनीतिक प्रतिनिधित्व के बीच अंतर को रेखांकित करता है। निष्कर्षतः, महिला राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावी राजनीतिक सशक्तिकरण में परिवर्तित करने के लिए आरक्षण के साथ राजनीतिक प्रशिक्षण, संस्थागत सहयोग, संसाधनों तक समान पहुँच, नेतृत्व-विकास तथा निर्णय-निर्माण में वास्तविक स्वायत्तता आवश्यक है।