मन्नू भंडारी की कहानियों में मध्यवर्गीय जीवन-संघर्ष एवं सामाजिक यथार्थ
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Abstract
स्वातंत्र्योत्तर हिंदी कहानी में नई कहानी आंदोलन ने जीवन के यथार्थ को नये सिरे से देखने और प्रस्तुत करने की दृष्टि विकसित की। मन्नू भंडारी इस आंदोलन की उन प्रमुख कथाकारों में हैं जिन्होंने महानगरीय और कस्बाई मध्यवर्ग के जीवन को, उसके आर्थिक संघर्ष, भावनात्मक एकाकीपन और बदलते संबंधों को अत्यंत सहज एवं प्रामाणिक भाषा में चित्रित किया। प्रस्तुत शोध पत्र में 'यही सच है', 'अकेली', 'त्रिशंकु', 'नई नौकरी', 'सयानी बुआ', 'एक प्लेट सैलाब' जैसी कहानियों के आधार पर मध्यवर्गीय जीवन के संघर्ष और तत्कालीन सामाजिक यथार्थ का विश्लेषण किया गया है। इस अध्ययन का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि मन्नू भंडारी की कहानियाँ साधारण मनुष्य के असाधारण आंतरिक संघर्ष को किस प्रकार कलात्मक ऊँचाई प्रदान करती हैं। यह शोध पत्र विश्लेषणात्मक एवं विवेचनात्मक पद्धति पर आधारित है।