महासमुन्द जिले के कक्षा 9 के विद्यार्थियों की शैक्षिक आकांक्षा पर आत्म-अवधारणा के प्रभाव का अध्ययन
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Abstract
इस शोध-पत्र का प्रमुख उद्देश्य महासमुन्द जिले के कक्षा 9 के विद्यार्थियों की शैक्षिक आकांक्षा पर आत्म-अवधारणा के सांख्यिकीय प्रभाव का अध्ययन करना है। विश्लेषण उपलब्ध 100 विद्यार्थी-प्रविष्टियों पर आधारित है। इनमें 50 छात्र, 50 छात्राएँ, 50 शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थी तथा 50 अशासकीय विद्यालयों के विद्यार्थी सम्मिलित हैं। पाँच विकासखंडों—महासमुन्द, बागबाहरा, पिथौरा, बसना और सरायपाली—से 20-20 प्रविष्टियों का समान वितरण रखा गया। आत्म-अवधारणा और शैक्षिक आकांक्षा को 0 से 100 के संयुक्त प्राप्तांकों के रूप में दर्शाया गया है। विश्लेषण हेतु आवृत्ति, प्रतिशत, माध्य, मानक विचलन, कार्ल पियर्सन सहसंबंध तथा सरल रैखिक प्रतिगमन का प्रयोग किया गया। आत्म-अवधारणा का माध्य 67.48 एवं मानक विचलन 8.28 तथा शैक्षिक आकांक्षा का माध्य 74.47 एवं मानक विचलन 9.12 प्राप्त हुआ। आत्म-अवधारणा और शैक्षिक आकांक्षा के मध्य उच्च धनात्मक संबंध प्राप्त हुआ, जिसका सहसंबंध गुणांक .729 और सार्थकता स्तर .001 से कम रहा। प्रतिगमन प्रतिमान सांख्यिकीय रूप से सार्थक पाया गया तथा आत्म-अवधारणा ने शैक्षिक आकांक्षा के प्रसरण का 53.16 प्रतिशत स्पष्ट किया। प्रतिगमन गुणांक .803 से ज्ञात हुआ कि आत्म-अवधारणा में एक इकाई वृद्धि के साथ शैक्षिक आकांक्षा के अनुमानित प्राप्तांक में लगभग .80 इकाई वृद्धि हुई। निष्कर्षतः अपनी योग्यता, अध्ययन-सामर्थ्य, सामाजिक स्वीकार्यता और भावी सफलता के प्रति सकारात्मक एवं यथार्थ धारणा रखने वाले विद्यार्थियों में उच्च शैक्षिक लक्ष्य विकसित होने की संभावना अधिक दिखाई देती है। चूँकि उपलब्ध आँकड़े पद्धति एवं सांख्यिकीय विश्लेषण के प्रदर्शन हेतु प्रयुक्त किए गए हैं, इसलिए उन्हें जिले की वास्तविक विद्यार्थी-जनसंख्या का प्रतिनिधि निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।