‘कथक कलाकारों की प्रदर्शन पूर्व अपेक्षाएँ, मंचीय अनुभव एवं प्रदर्शनोत्तर आत्म मूल्यांकन – एक मनोवैज्ञानिक अध्ययन’
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Abstract
कथक भारतीय शास्त्रीय नृत्य की एक महत्वपूर्ण विधा है, जिसमें भाव अभिव्यक्ति, लय, ताल, तकनीकी दक्षता, सौंदर्य बोध का समन्वय होता है। एक कथक कलाकार का प्रदर्शन केवल शारीरिक विद्या का ही प्रदर्शन नहीं होता है, अपितु इसमें कई संज्ञान, मानसिक तनाव, एकाग्रता, अनुशासन व आत्मविश्वास जैसे कारक भी प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं। प्रदर्शन से पहले कलाकार के हृदय में कई तरह की भावनाएँ जागृत होती रहती हैं जैसे उत्सुकता, प्रदर्शन का होना, दर्शकों की प्रतिक्रिया, गुरु की अपेक्षाएँ एवं स्वयं का आत्म मूल्यांकन इत्यादि। इस यात्रा में नर्तक कभी तो वह अपने आपको आत्मविश्वास से भरा हुआ, सकारात्मक अनुभव करता है तो कभी मंचीय चिंता, तनाव या असुरक्षित परिस्थितियों का सामना भी करता है। प्रदर्शन के बाद वह अपनी प्रस्तुति का मूल्यांकन भी स्वयं गुरु के द्वारा या दर्शकों की प्रतिक्रिया से करने का प्रयास है। कालांतर में यह प्रक्रिया कलाकार विकास प्रभावित होती है।
इस अध्ययन का उद्देश्य कथक कलाकारों की मंच प्रस्तुति से पहले, मंच के अनुभव तथा प्रदर्शनोत्तर आत्ममूल्यांकन का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करना है। अध्ययन करने से मानसिक तैयारी, भावनात्मक नियंत्रण, आत्म विश्वास, कथक प्रदर्शन की सफलता में किस प्रकार सहायक है, ये जानकारी मिलती है। यह शोध नृत्य एवं मनोविज्ञान के अंतर्विषयक क्षेत्र में नवीन शोध विकसित करने का प्रयास करेगा।