भारतीय समाज में कार्यरत महिलाओं की बदलती भूमिका: परिवार एवं कार्यस्थल के मध्य संतुलन: एक विश्लेषणात्मक शोध अध्ययन

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Priti Gupta, Yogesh Kumar

Abstract

पिछले तीन दशकों में भारतीय समाज में कामकाजी महिलाओं की भूमिका में अभूतपूर्व परिवर्तन देखा गया है। शिक्षा के प्रसार, आर्थिक उदारीकरण, शहरीकरण तथा वैश्वीकरण जैसे कारकों ने महिलाओं को घर की चारदीवारी से निकालकर कार्यस्थल के व्यापक क्षेत्र में प्रवेश दिलाया है। आज महिलाएँ चिकित्सा, इंजीनियरिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, प्रशासन, शिक्षा, बैंकिंग तथा उद्यमिता सहित लगभग हर क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। परंतु इस आर्थिक सशक्तीकरण के साथ-साथ उन्हें परिवार और कार्यस्थल के मध्य संतुलन बनाने की एक जटिल चुनौती का भी सामना करना पड़ रहा है। पारंपरिक सामाजिक संरचना में महिला से घरेलू उत्तरदायित्वों की अपेक्षा आज भी प्रबल है, जबकि कार्यस्थल पर पेशेवर दक्षता और प्रतिबद्धता की माँग भी निरंतर बढ़ रही है। इस दोहरी भूमिका के कारण महिलाओं में मानसिक तनाव, थकान, अपराध-बोध तथा समय के अभाव जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र भारतीय समाज में कामकाजी महिलाओं की बदलती भूमिका का ऐतिहासिक एवं समकालीन परिप्रेक्ष्य से विश्लेषण करता है तथा परिवार व कार्यस्थल के बीच संतुलन स्थापित करने में आने वाली चुनौतियों, उपलब्ध सहायक तंत्रों तथा संभावित समाधानों की विस्तृत विवेचना प्रस्तुत करता है। अध्ययन द्वितीयक स्रोतों- शोध पत्रिकाओं, सरकारी रिपोर्टों, जनगणना आँकड़ों तथा विद्वानों के पूर्व अध्ययनों पर आधारित है। निष्कर्षतः यह पाया गया कि संतुलन की समस्या केवल व्यक्तिगत प्रबंधन का विषय नहीं, अपितु सामाजिक मानसिकता, संस्थागत नीतियों तथा पारिवारिक सहयोग की सम्मिलित उपज है, जिसके समाधान हेतु बहुस्तरीय प्रयासों की आवश्यकता है।

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