राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के युग में भारतीय अध्यापक शिक्षा का पुनरुत्थान: उदीयमान प्रवृत्तियां, चुनौतियां एवं परिवर्तन

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संदीप पाटील, पिन्टू कुमार

Abstract

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 भारतीय शिक्षा जगत में एक निर्णायक परिवर्तन की अभिलाषा करती है, जो शिक्षक एवं अध्यापक शिक्षा को समूची शिक्षा व्यवस्था में सुधार के केंद्र में रखती है। प्रस्तुत शोध आलेख अध्यापक शिक्षा प्रणाली के समग्र बदलाव के लिए नीति के दूरदर्शी एवं समग्र दृष्टिकोण से अध्ययन करता है। इसके तहत, पारंपरिक एवं विविक्त शिक्षक प्रशिक्षण प्रतिमान से हटकर एकात्मिक, बहु-अनुशासनात्मक उपागम, लचीलेपन तथा डिजिटल साक्षरता पर आधारित एक अभिनव अध्यापक शिक्षा प्रतिमान की ओर बढ़ने वाले नवोन्मेष का विश्लेषण किया गया है। यह अध्ययन विशेष रूप से, चार वर्षीय एकीकृत अध्यापक शिक्षा कार्यक्रम (ITEP), शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय व्यावसायिक मानक (NPST), निरंतर व्यावसायिक प्रोन्नयन (CPD) की अनिवार्यता तथा क्षमता-आधारित अधिगम (Competency-based Learning) जैसे प्रमुख नीतिगत बदलावों की पड़ताल करता है।


नीतिगत दस्तावेजों, शैक्षणिक साहित्य एवं केस स्टडीज़ के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि जहाँ एक ओर राष्ट्रीय  शिक्षा नीति (NEP) 2020 अध्यापक व्यवसाय पेशे की "गरिमा एवं स्वायत्तता" को बहाल करने का रोडमैप प्रस्तुत करती है; वहीं दूसरी ओर इसके वास्तविक क्रियान्वयन में कई गहन संरचनात्मक, नियामक (Regulatory), तथा बुनियादी ढांचे से जुड़ी चुनौतियाँ हैं। इनमें डिजिटल विभाजन (Digital Divide), बदलाव के प्रति पारंपरिक विरोध, समान पहुंच की कमी एवं रटकर सीखने की संस्कृति से बाहर निकलना शामिल हैं। प्रस्तुत शोध आलेख से यह निष्कर्ष निकलता है कि इन बाधाओं को दूर करने तथा 21वीं सदी की शैक्षिक आवश्यकताओं के अनुरूप संदर्भ-अनुकूल सुधारों के लिए सभी संबंधित हितधारकों (Stakeholders) के बीच एक संगठित, सहयोगी एवं पर्याप्त संसाधनों वाले राष्ट्रीय प्रयास की आवश्यकता है, ताकि शिक्षकों को एक नए, जीवंत तथा समान भारतीय ज्ञान समाज के मुख्य निर्माता के रूप में सशक्त बनाया जा सके।

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