भारतीय संविधान निर्माण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: औपनिवेशिक शासन से लोकतंत्र तक

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मनीष कुमार

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भारतीय संविधान का निर्माण केवल एक कानूनी दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया नहीं था, बल्कि यह भारत के लंबे स्वतंत्रता संघर्ष, सामाजिक परिवर्तन और लोकतांत्रिक आकांक्षाओं का परिणाम था। ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान भारतीय जनता ने राजनीतिक अधिकारों, समानता और स्वशासन की मांग लगातार उठाई। इसी संघर्ष ने संविधान निर्माण की पृष्ठभूमि तैयार की। भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन ने संविधान निर्माण की दिशा को गहराई से प्रभावित किया। महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, डॉ. भीमराव आंबेडकर तथा अन्य नेताओं ने स्वतंत्र, लोकतांत्रिक और समतामूलक भारत की कल्पना प्रस्तुत की। 1931 के कराची प्रस्ताव में मौलिक अधिकारों और सामाजिक न्याय पर विशेष बल दिया गया, जिसने बाद में संविधान के मूल सिद्धांतों को प्रभावित किया। 1946 में संविधान सभा का गठन हुआ, जिसने लगभग तीन वर्षों तक विचार-विमर्श करके संविधान तैयार किया। संविधान सभा में विभिन्न वर्गों, समुदायों और क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। 26 नवंबर 1949 को संविधान को अंगीकृत किया गया और 26 जनवरी 1950 को इसे लागू किया गया। इसी दिन भारत एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य बना।

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