"वैदिक साहित्य में कूटनीति के सिद्धांत: आधुनिक वैश्विक राजनीति और विदेश नीति के संदर्भ में"
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Abstract
इक्कीसवीं सदी की समकालीन वैश्विक राजनीति और अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध मुख्य रूप से पश्चिमी यथार्थवादी (Realist) और शक्ति-केंद्रित सिद्धांतों द्वारा संचालित हैं, जो अक्सर राष्ट्रों के बीच प्रतिस्पर्धा और संघर्ष को जन्म देते हैं | ऐसे भू-राजनीतिक तनावों के बीच, यह शोध पत्र प्राचीन भारतीय वाङ्मय, विशेषकर वैदिक साहित्य (ऋग्वेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद) में निहित कूटनीतिक और राजनीतिक सिद्धांतों की आधुनिक प्रासंगिकता का विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है | गुणात्मक और तुलनात्मक शोध प्रविधि का उपयोग करते हुए, इस पत्र में वैदिक काल की दूत-व्यवस्था (जैसे सरमा-पणि संवाद), संधि-विग्रह के नियम, बहुपक्षवाद (सभा और समिति), तथा 'वसुधैव कुटुम्बकम्' और 'भूमि सूक्त' जैसे वैश्विक कल्याणकारी दर्शनों का मूल्यांकन किया गया है | अध्ययन से निष्कर्ष निकलता है कि प्राचीन वैदिक कूटनीति 'शून्य-संचय खेल' (Zero-Sum Game) के बजाय 'धर्म' (Rule of Law), नैतिकता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर आधारित है | वर्तमान समय में भारत की विदेश नीति में प्रयुक्त 'सॉफ्ट पावर', 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति, 'वैक्सिन मैत्री' और जलवायु कूटनीति (International Solar Alliance) सीधे तौर पर इन वैदिक मूल्यों की व्यावहारिक निरंतरता को दर्शाते हैं | अंततः, यह शोध पत्र समकालीन अंतर्राष्ट्रीय विवादों, युद्धों और पर्यावरण संकटों के समाधान के लिए पश्चिमी यथार्थवाद के विकल्प के रूप में एक नैतिक और न्यायसंगत वैदिक कूटनीतिक मॉडल को अपनाने का सुझाव देता है |