डिजिटल भारत और नई शिक्षा नीति के संदर्भ में डॉ भीमराव अम्बेडकर की सामाजिक न्याय अवधारणा का समकालीन अध्ययन

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चारू मिश्रा, शैतान सिंह चौहान

Abstract

21वीं सदी में भारत तीव्र तकनीकी एवं शैक्षिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। इंटरनेट, डिजिटल तकनीकों एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने शिक्षा, समाज एवं प्रशासन को व्यापक रूप से प्रभावित किया है। भारत सरकार द्वारा प्रारंभ किया गया डिजिटल इंडिया अभियान तथा नई शिक्षा नीति 2020 देश को समावेशी एवं तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। हालाँकि डिजिटल असमानता, इंटरनेट की सीमित पहुँच, तकनीकी संसाधनों की कमी एवं डिजिटल निरक्षरता जैसी समस्याएँ सामाजिक न्याय के समक्ष गंभीर चुनौती बनी हुई हैं। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों एवं महिलाओं को अभी भी समान डिजिटल एवं शैक्षिक अवसर प्राप्त नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे संदर्भ में डॉ भीमराव अम्बेडकर के सामाजिक न्याय, समानता एवं शिक्षा संबंधी विचार अत्यंत प्रासंगिक हैं। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम माना। प्रस्तुत शोधपत्र में डिजिटल भारत एवं नई शिक्षा नीति के संदर्भ में डॉ भीमराव अम्बेडकर की सामाजिक न्याय अवधारणा का समकालीन अध्ययन किया गया है। अध्ययन वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक शोध पद्धति पर आधारित है तथा पुस्तकों, शोधपत्रों, सरकारी रिपोर्ट्स एवं डिजिटल स्रोतों का उपयोग किया गया है।

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