सीता का आदर्श और नारी सशक्तिकरण: एक बहुआयामी विश्लेषण

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शैलेंद्र शुक्ला, सुन्नीकृपानाथ सिंह

Abstract

प्रस्तुत शोध आलेख में सीता के आदर्श चरित्र की विभिन्न व्याख्याओं को नारी सशक्तिकरण की वर्तमान चर्चा से जोड़कर देखा गया है। वाल्मीकि रामायण, रामचरितमानस और लोककथाओं में सीता का चरित्र केवल एक अच्छी पत्नी और त्याग की मिसाल नहीं है। उसमें आत्मसम्मान, विरोध करने की ताकत और अपने निर्णय खुद लेने की क्षमता भी साफ झलकती है। शोध में सीता के आदर्श को तीन पहलुओं - परिवार, समाज और वैश्विक स्तर पर जांचा गया है। इसमें एक विशेष तरीके से ग्रंथों का विश्लेषण, तुलना और नारीवादी दृष्टिकोण से आलोचना की गई है। सार यह है कि द सीता का चरित्र 21वीं सदी की महिलाओं को प्रेरित करता है। द सीता का चरित्र उन्हें पुराने मूल्यों और नए हकों दोनों की ओर ले जाता है।

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