शोध-पत्र का शीर्षक: 21वीं शताब्दी की प्रवासी पत्रिकाओं का हिंदी के विकास में योगदान
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यह शोध-पत्र 21वीं शताब्दी में प्रवासी हिंदी पत्रिकाओं की भूमिका और उनके माध्यम से हिंदी भाषा व साहित्य के विकास का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। वैश्वीकरण, प्रव्रजन और डिजिटल तकनीक के विस्तार ने हिंदी को राष्ट्रीय सीमाओं से बाहर एक वैश्विक भाषा के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रवासी समाज द्वारा संचालित हिंदी पत्रिकाओं ने भाषा-संरक्षण, साहित्यिक सृजन, सांस्कृतिक अस्मिता और अकादमिक विमर्श को सुदृढ़ किया। अमेरिका, यूरोप, मॉरीशस, फिजी और कैरेबियन देशों से प्रकाशित पत्रिकाओं तथा ऑनलाइन मंचों ने प्रवासी अनुभवों, पहचान-बोध और बहुसांस्कृतिक संवाद को हिंदी साहित्य का अभिन्न अंग बनाया। शोध का निष्कर्ष है कि प्रवासी पत्रिकाएँ हिंदी के वैश्विक विकास की आधारशिला हैं।
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