राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का संगठनात्मक विकास : संगठनात्मक निर्माण से अखिल भारतीय विस्तार तक डॉ. हेडगेवार एवं गोलवलकर गुरुजी के योगदान का विश्लेषणात्मक अध्ययन.
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Abstract
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारतीय समाज की एक प्रमुख सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था के रूप में विकसित हुआ है। इसकी स्थापना से लेकर अखिल भारतीय स्तर पर विस्तार तक की विकास प्रक्रिया में डॉ. केशव बळीरामपंत हेडगेवार तथा माधव सदाशीवराव गोलवलकर (गुरुजी) का योगदान निर्णायक रहा है। प्रस्तुत शोध-पत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थागत विकास की प्रक्रिया का विश्लेषण किया गया है, जिसमें डॉ. हेडगेवार द्वारा किए गए संस्थात्मक निर्माण और गोलवलकर गुरुजीके नेतृत्व में हुए संगठनात्मक एवं वैचारिक विस्तार का सम्यक अध्ययन किया गया है।
डॉ. हेडगेवार ने संघ की नींव रखते समय व्यक्ति-निर्माण, अनुशासन, शाखा-प्रणाली तथा राष्ट्रभावना को संगठन का मूल आधार बनाया। उनकी दृष्टि में सशक्त राष्ट्र निर्माण का मार्ग सुदृढ़ सामाजिक संगठन से होकर जाता था। दूसरी ओर, गोलवलकर गुरुजीने इसी वैचारिक आधार को बनाए रखते हुए संघ को अखिल भारतीय स्वरूप प्रदान किया। उनके नेतृत्व में प्रचारक व्यवस्था, संगठनात्मक ढांचे का विस्तार तथा समाज के विविध वर्गों तक संघ कार्य का प्रसार हुआ। यह अध्ययन ऐतिहासिक एवं विश्लेषणात्मक पद्धति पर आधारित है तथा प्राथमिक एवं द्वितीयक स्रोतों के माध्यम से संघ के विकास के दोनों चरणों का तुलनात्मक मूल्यांकन करता है। शोध से यह निष्कर्ष प्राप्त होता है कि संघ की स्थायित्वपूर्ण वृद्धि डॉ. हेडगेवार की सुदृढ़ संस्थात्मक आधारशिला और गोलवलकर गुरुजीकी व्यापक संगठनात्मक दृष्टि का संयुक्त परिणाम है। यह अध्ययन भारतीय संगठनात्मक नेतृत्व और सामाजिक आंदोलनों के अध्ययन में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करता है।